यहां रावण ने काटा था अपना सिर, भगवान शिव से पहले होती है रावण की पूजा
(लगभग सभी लोग यह जानते होंगे कि रावण के 10 सिर थे लेकिन इस बारे में बहुत कम ही लोगों को पता होगा कि आखिर पहली बार रावण ने अपना शीश कब काटा था। भास्कर डॉट कॉम आपको इस पूरी कहानी के बारे में बता रहा है कि आखिर क्यों काटना पड़ा था रावण को अपना शीश। साथ ही ,क्यों होती है भगवान शिव से पहले रावण की पूजा।)
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उदयपुर. राजस्थान का धर्म और आस्था से बहुत ही गहरा नाता है। लेक सिटी के नाम से फेमस उदयपुर में एक ऐसी जगह है जहां भगवान शिव से पहले रावण की पूजा की जाती है। यह स्थान है भगवान कमलनाथ महादेव, जो झीलों की नगरी उदयपुर से 80 किमी दूर झाड़ोल तहसील में स्थित है। कहा जाता है, इस मंदिर की स्थापना स्वयं लंकापति रावण ने की थी।
[embed]https://trendingnewswala.online/most-famous-powerful-lord-shiva-temples/[/embed]
यह वह स्थान है जहां भगवान शिव को खुश करने के लिए रावण ने अपना सिर काट कर अग्नि कुण्ड में अर्पित कर दिया था। इस स्थान के साथ ऐसी मान्यता है कि यदि भगवान शिव की पूजा से पहले रावण की पूजा ना की जाये तो सारा कर्म काण्ड व्यर्थ जाता है अर्थात पूजा का कोई फल नहीं मिलता। कहा जाता है कि मेवाड़पति और वीर योद्धा महाराणा प्रताप ने हल्दीघाटी की लड़ाई के बाद कुछ समय इस स्थान पर व्यतीत किया था।
(लगभग सभी लोग यह जानते होंगे कि रावण के 10 सिर थे लेकिन इस बारे में बहुत कम ही लोगों को पता होगा कि आखिर पहली बार रावण ने अपना शीश कब काटा था। भास्कर डॉट कॉम आपको इस पूरी कहानी के बारे में बता रहा है कि आखिर क्यों काटना पड़ा था रावण को अपना शीश। साथ ही ,क्यों होती है भगवान शिव से पहले रावण की पूजा।)
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उदयपुर. राजस्थान का धर्म और आस्था से बहुत ही गहरा नाता है। लेक सिटी के नाम से फेमस उदयपुर में एक ऐसी जगह है जहां भगवान शिव से पहले रावण की पूजा की जाती है। यह स्थान है भगवान कमलनाथ महादेव, जो झीलों की नगरी उदयपुर से 80 किमी दूर झाड़ोल तहसील में स्थित है। कहा जाता है, इस मंदिर की स्थापना स्वयं लंकापति रावण ने की थी।
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यह वह स्थान है जहां भगवान शिव को खुश करने के लिए रावण ने अपना सिर काट कर अग्नि कुण्ड में अर्पित कर दिया था। इस स्थान के साथ ऐसी मान्यता है कि यदि भगवान शिव की पूजा से पहले रावण की पूजा ना की जाये तो सारा कर्म काण्ड व्यर्थ जाता है अर्थात पूजा का कोई फल नहीं मिलता। कहा जाता है कि मेवाड़पति और वीर योद्धा महाराणा प्रताप ने हल्दीघाटी की लड़ाई के बाद कुछ समय इस स्थान पर व्यतीत किया था।
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